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उनहत्तरवीं वर्षगाँठ पर…

सत्तर में अब कम रहा, बस केवल एक साल
जी भरकर जीवन जीया, रखा न कोई मलाल

कुछ शिकायतों से रहे, घरवाले हैरान
‘कोरोना’ के काल में उनका किया निदान

वानप्रस्थ अब चल रहा, आएगा संन्यास
मोह-माया हो जाए कम, करता यह अभ्यास
– गोविन्द मूँदड़ा