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कान्हा और राधा

कान्हा
राधा ने त्याग का पंथ बुहारा, तो पंथ पे फूल बिछा गया कान्हा
राधा ने प्रेम की आन निभाई तो आन का मान बढ़ा गया कान्हा
कान्हा के तेज का भा गई राधा, तो राधा के रूप को भा गया कान्हा
कान्हा को कान्हा बना गई राधा तो राधा को राधा बना गया कान्हा

राधा
गोपियाँ गोकुल में थी अनेक परन्तु गोपाल को पा गई राधा
बांध के पाश में नाग नथैया को, काम-विजेता बना गई राधा
काम-विजेता को, प्रेम प्रणेता को, प्रेम पियुष पिला गई राधा
विश्व को नाच नचाता है, उस श्याम को नाच नचा गई राधा
-देवल आशीष