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बंसुरी बजाई नहीं जाएगी

बृज के बिहारी, बात इतनी हमारी सुनो,
बिनु कहे मन की खटाई नहीं जाएगी,
कान्हा के अधर पर सौत सी ठहर गई,
बंसरी निगोड़ी हरजाई नहीं जाएगी।

भोली नहीं राधा रानी, मन में है अब ठानी
साँवरे से रास तो रचाई नहीं जाएगी
राधा की कलाई थामि विहंसि कन्हाई कहे
राधा बिन बंसुरी बजाई नहीं जाएगी।
-सागर त्रिपाठी