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सत्तर में अब कम रहा, बस केवल एक साल जी भरकर जीवन जीया, रखा न कोई मलाल कुछ शिकायतों से रहे, घरवाले हैरान ‘कोरोना’ के काल में उनका किया निदान वानप्रस्थ अब चल रहा, आएगा संन्यास मोह-माया हो जाए कम, करता यह अभ्यास – गोविन्द मूँदड़ा ...

इतना आगे हम बढ़ें, देखे जगत-जहान, सारी दुनिया मिल कहे, जय-जय हिंदुस्तान। ना झगड़ा मतभेद ना, ना आपस में बैर, एक पटल पर बैठ कर, सबकी माँगें खैर। आपस में हरदम रहे, सुखद सरल संवाद, खुशहाली परिवेश में, देश रहे आबाद। आजादी के पर्व पर, बस इतना सन्देश, धर्म जात हर पंथ से, ऊपर रखना देश। -चौ. मदन मोहन समर ...

लहर लहर दे रही गवाही र्इंट र्इंट इतिहास सुनाए, इस मिट्‌टी का ज़र्रा ज़र्रा उन वीरों की याद दिलाए। जो साहस के अग्रदूत बन अंधेरों के पार गए, प्राणों की आहुति देकर माँ का कर्ज़ उतार गए। जिनके यौवन की ज्वाला ने आग लगा दी सागर में, जिनके तप की चिंगारी से जलीं मशालें घर घर में। लोहे की ज़ंजीरें ...

कान्हा राधा ने त्याग का पंथ बुहारा, तो पंथ पे फूल बिछा गया कान्हा राधा ने प्रेम की आन निभाई तो आन का मान बढ़ा गया कान्हा कान्हा के तेज का भा गई राधा, तो राधा के रूप को भा गया कान्हा कान्हा को कान्हा बना गई राधा तो राधा को राधा बना गया कान्हा राधा गोपियाँ गोकुल में थी ...

बृज के बिहारी, बात इतनी हमारी सुनो, बिनु कहे मन की खटाई नहीं जाएगी, कान्हा के अधर पर सौत सी ठहर गई, बंसरी निगोड़ी हरजाई नहीं जाएगी। भोली नहीं राधा रानी, मन में है अब ठानी साँवरे से रास तो रचाई नहीं जाएगी राधा की कलाई थामि विहंसि कन्हाई कहे राधा बिन बंसुरी बजाई नहीं जाएगी। -सागर त्रिपाठी ...

जग की सब पहेलियों क, दे के कैसा हल गए लोक के जो प्रश्न थे वो, शोक में बदल गए सिद्ध कुछ हुए न दोष, दोष सारे टल गए सीता आग में ना जली, राम जल में जल गए सीताजी का हर जन्म, बचाव सिर्फ राम है, भाव सूचियाँ बहुत हैं, भाव सिर्फ राम हैं। -अमन अक्षर ...

भारत का कण-कण साक्षी है जीवन का क्षण-क्षण साक्षी है तपस्थली जो ॠषि मुनियों की कुटियों का तृण-तृण साक्षी है। धरती और अनंत व्योम में राम रमे हैं रोम रोम में चंद सिरफिरों को समझाने क्या हम अपने प्राण दें? राम हुए हैं कितने और प्रमाण दें? -डॉ. कमलेश शर्मा ...

‘राम लला जन्मभूमि’ लेकर हमने एक विजय तो प्राप्त कर ली, मगर क्या मात्र भूमि के लिए ही हमने इतनी जद्दोजहद की? इस पर हमें विचार करने की आवश्यकता है। हमें राम का मंदिर मात्र नहीं बनाना है वरन्‌ राम का चरित्र भी जीने की कोशिश करना है। एक राम थे, जिसने पिता की एक आज्ञा पर १४ वर्ष का ...

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